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कुछ नया जानें

Varun

  • रात के दो बज रहे हैं… मैहर रेलवे स्टेशन पर बैठा हूँ। सामने से आती ठंडी हवा में अक्टूबर की गुलाबी सर्दी का एहसास है और मन में माँ शारदा की इस पावन नगरी के प्रति एक अनकही श्रद्धा। साथ में ड्राइवर साहब हैं। हम अपने सहकर्मियों की ट्रेन आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।… Read more

  • हज़ारों वर्ष पुरानी कथाओं में छिपे वे सूत्र, जो आज भी हमारे व्यक्तिगत जीवन, निर्णयों और कॉर्पोरेट नेतृत्व को दिशा दे सकते हैं। कल मैहर से लखनऊ वापस आते वक्त हम फँस गए जाम के झाम में! पहले नैनी पुल पर नो-एंट्री खुलने के इंतज़ार में। फिर बैरहना में मेले के हुजूम में। सोचा, चलो… Read more

  • S.I.R. – It’s done Bro!

    प्रयागराज से लखनऊ तक मतदाता सूची में नाम स्थानांतरित कराने का हमारा अनुभव—कुछ कागज, पाँच BLO और लोकतंत्र पर मचे बेमतलब के शोर पर एक व्यंग्यात्मक नजर। एसआईआर की कहानी: हमारे नाम कटे, कॉकरोचों की राजनीति चमकी! एसआईआर के नाम पर इतना हो-हल्ला मचा है कि लगता है चुनाव आयोग मतदाता सूची नहीं, लोकतंत्र का… Read more

  • रात के ग्यारह बज रहे हैं। पिछले कई समय से जिंदगी में बहुत दौड़-भाग लगी हुई है। सुबह बहुत जल्दी उठकर भागना, दिनभर काम में उलझे रहना और फिर उसी थकान के साथ दिन का खत्म हो जाना। आज का दिन भी कुछ ऐसा ही था। सुबह रास्ते में था, तभी खबर मिली—नाना नहीं रहे।… Read more

  • WHAT IF CAPTAIN SMIT HAD NOT OPENED THAT COCKPIT DOOR? Read that question again. On 30 September, Flydubai Flight FZ1073 was flying from Dubai to Tel Aviv with more than 170 passengers. Inside the cockpit, the Indian captain, Smit Machchhar, was attacked by his co-pilot. The aircraft then plunged nearly 14,000 feet in less than… Read more

  • Intent. Integrity. Idealism. Private नौकरी और corporate sector में बहुत साल बिताने के बाद एक अजीब बीमारी हो जाती है। आप हर चीज़ को Project समझने लगते हैं। सुबह पत्नी कह दे—“आज सब्ज़ी ले आना।” दिमाग तुरंत कहता है—Objective: Vegetable Procurement.Timeline: EOD.Resource: Self.Budget: ₹500.Risk: सब्ज़ी महंगी हुई तो negotiation failure. बच्चे कहें—“पापा, पार्क चलो।” आप… Read more

  • कौड़ी से QR कोड तक

    पैसे की हजारों साल पुरानी यात्रा में कहीं हम फिर से पीछे तो नहीं मुड़ रहे? पैसे कमाने की जद्दोजहद में हम इतने उलझे हुए हैं कि कभी-कभी पैसे के बारे में सोचने का ख्याल ही नहीं आता। लेकिन पिछले कुछ दिनों से बाजार में घूमते हुए, व्यापारियों से मिलते हुए और उनकी बातें सुनते… Read more

  • भीषण बरसात और त्योहार की इस सुस्त रफ़्तार सुबह के बीच, जब बाज़ार का रुख उम्मीदों के अनुरूप नहीं दिख रहा था, तो मन थोड़ा असमंजस में था। हाथ में फोन लिए यूँ ही WhatsApp के स्टैटस स्क्रॉल कर रहा था—कहीं किसी मासूम बच्चे को कान्हा के वस्त्रों में सजाया गया है, तो कहीं कॉरपोरेट… Read more

  • Are We Teaching Our Children How to Succeed — But Not How to Live? IAS Divya Mittal’s reflections on education raise a question that goes far beyond schools, examinations or careers. They make us look at something uncomfortable about Indian society: We have become exceptionally good at teaching our children how to succeed. But somewhere… Read more

  • लखनऊ में रहते हुए छह वर्ष से अधिक हो चुके। पर घर से करीब साठ किलोमीटर एक ऐतिहासिक मंदिर जिसका वर्णन महाभारत से लेकर घर में – गाँव में बचपन से ही सुनता आ रहा। बात कर रहा बाराबंकी जिले के रामनगर तहसील स्थित श्री लोधेश्वर महादेव मंदिर की, जिनके दर्शन का आज परम सौभाग्य… Read more

  • The Tattoo I Never Got I have always liked tattoos. Not because they are fashionable. Not because they make a statement. But because every tattoo tells a story. A memory. A belief. A person. A moment frozen forever on the skin. Over the years, I have often thought about getting one. Yet somehow, I never… Read more

  • फीफा फुटबॉल विश्व कप अमेरिका में शुरू हो चुका है और हमेशा की तरह हम भारतीय इसका हिस्सा केवल दर्शक बनकर ही बनेंगे। हर दिन खेले जा रहे मैचों से कोई न कोई नया रोमांच, नया विवाद और नई कहानी निकलकर सामने आ रही है। लेकिन कल खेले गए मैच के बाद हुई एक घटना… Read more

  • The Diverging Roads of Ramesh and Suresh: India’s Gig Economy Dilemma In a small village near Raebareli in Uttar Pradesh, two friends shared the same dream. Ramesh and Suresh grew up together, studied together, and eventually completed an ITI course in Refrigeration and Air Conditioning. Both were bright, hardworking, and eager to escape the cycle… Read more

  • “कभी-कभी इंसान तंबाकू नहीं चबाता… तंबाकू धीरे-धीरे इंसान को चबा जाता है।” उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में रहने वाले विमल की उम्र लगभग पचास वर्ष थी। मेहनती इंसान। सुबह काम, दिनभर भागदौड़, शाम दोस्तों के साथ चाय। जीवन सामान्य था, लेकिन एक आदत असामान्य रूप से खतरनाक थी—खैनी, जर्दा और पान मसाला।… Read more

  • आज सोनीपत हरियाणा मार्केट विजिट करते हुए एक डीलर के यहाँ बैठे हुए बातों ही बातों में उनके गाँव के नाम पर चर्चा होने लगी। कैसे गढ़ी गाँव का नाम बढ़खालसा पड़ा। और फिर जो जानने को मिला वह न सिर्फ अन्दर तक झकझोरने वाला था पर अविस्मयी और हृदयविदारक था। “कुछ बलिदान इतने विराट… Read more

  • “कुछ चीज़ें कभी खोती नहीं हैं… वे बस अपने घर लौटने की प्रतीक्षा करती हैं।” कल्पना कीजिए… समुद्र के किनारे एक प्राचीन नगर। जहाज़ों की कतारें। दूर सुमात्रा और जावा से आए व्यापारी। मठों में गूंजते मंत्र। और एक ऐसा साम्राज्य जिसकी पहुँच केवल भूमि तक नहीं, बल्कि महासागरों तक थी। यह कोई कल्पना नहीं,… Read more

  • कुछ शायर साहित्यिक महफ़िलों तक सीमित रह जाते हैं।और कुछ ऐसे होते हैं जो पूरे समाज की सामूहिक स्मृतियों का हिस्सा बन जाते हैं। बशीर बद्र साहब उन्हीं चुनिंदा नामों में से एक हैं। मुशायरों से लेकर मध्यमवर्गीय बैठकखानों तक, कॉलेज की डायरियों से लेकर मोबाइल संदेशों तक, और दिलचस्प बात यह कि भारतीय संसद… Read more

  • Somewhere in the Netherlands, after 314 years of colonial custody, 30 kilograms of Indian civilizational memory quietly boarded a flight home. And somewhere in India, millions of people opened WhatsApp and screamed: “BROOOO… MELODI 😂🍬” Welcome to modern Bharat — where an 11th-century Chola copper charter struggles for screen time against a toffee packet gifted… Read more

  • Somewhere in a brightly lit newsroom, anchors screamed words like “NEET Paper Leak”, “Mastermind”, “Scam”, “Arrests”. Cameras flashed. Debates raged. Newspapers bled black ink across their front pages. But hidden beneath all that noise was something far darker than a leaked examination paper. The slow leaking of a nation’s character. Yesterday morning, I sat quietly… Read more

  • Some stories entertain you. Some stories inspire you. And then there are stories that quietly hold a mirror in front of your soul. The Avenger Within is not just about superheroes, Marvel, or the battle between good and evil. It is about us — the ordinary people fighting extraordinary battles inside our own minds every… Read more

  • ऑफिस में एसी की कूलिंग सही ना होने पर एडमिन को ईमेल कर शिकायत करने वाले हैं हम… चिलचिलाती धूप में काला चश्मा, छाता और सनस्क्रीन लगाकर बाहर निकलने वाले हैं हम… साल भर छोटी छोटी कमियों पर उनको लताड़ने वाले हैं हम… और हाँ आज अपने ह्वाट्सऐप लिंक्डइन और सोशल मीडिया पर चमचमाते स्टेटस… Read more

  • Cricket vs Hockey in India

    Before cricket became a religion, hockey was India’s identity. So what changed? A miracle in 1983 didn’t just win a World Cup—it united a nation that was slowly drifting apart. Read more

  • पिछले कुछ आठ दस दिनों से यह चित्र बनाने का प्रयास कर रहा। वो लखबीर सिंह लक्खा जी का भजन है ना – “के श्री राम चंद्र जी के दरबार में विभीषण ने ताना मारा के हे बजरंगी क्या तेरे मन में भी राम हैं?” हनुमान जी ने प्रभु श्री राम का नाम लिया और… Read more

  • सही मतलब….???

    Sometimes, life brings back things we once experienced… but never truly understood. A simple prayer from our school morning assemblies— something we sang routinely with closed eyes and folded hands— when heard again after years, suddenly feels deeply meaningful. Have you ever thought that “Itni Shakti Hame Dena Data…” is not just a prayer, but… Read more

  • दो जोड़ी चप्पल

    उन छोटे छोटे नंगे पैरों से उड़ती धूल अभी भी आँखों में चुभ रही। और बार बार आँखों में उतराता पानी पता नहीं उस धूल की वजह से है या उन मासूम पैरों में चुभते सड़क के कंकड़ की टीस, कह पाना मुश्किल है। लगभग छत्तीस घण्टे बीत चुके हैं पर अभी भी कल सुबह… Read more

  • हमारे स्कूल में सुबह की मॉर्निंग असेंबली में प्रतिदिन श्रीमद्भगवद गीता का पाठ होता था। नियम इतना सख्त था की असेंबली के दौरान टीचर्स ग्राउंड में घूम घूम कर घूर घूर कर सभी छात्रों के हाथों में गीता है या नहीं इसका निरीक्षण करते थे। पूरी यूनिफार्म, चमकते जूते, नाख़ून और बाल मैंटेन करने जैसे… Read more

  • Kismat ka Khel – #Dhurandhar story

    “Kismat ki ek bahut khoobsurat aadat hai…ki wo waqt aane par badalti hai…Lekin filhaal…Nazar aur Sabr…” There are dialogues…and then there are doctrines. This one, delivered by R. Madhavn as the NSA (clearly inspired by Ajit Doval), becomes the axis around which Dhurandhar – The Revenge revolves. ⸻ From the very first frame opening with… Read more

  • What’s your Hobby?

    Strange how this one question has followed us all our lives. As children, we were asked this in school introductions.As adults, we use it to start conversations.Sometimes we even use it to quietly judge a person’s personality. And if that wasn’t enough, the question proudly appears everywhere — from resumes to matrimony profiles. “What’s your… Read more

  • अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस – 8 मार्च पर लेख International Women’s Day 8th March Read more

  • Back to Where It All Began

    (MPVM | 24th January 2026) I passed out of school in 2009. I completed Engineering in 2013. I started my career the same year. I got married in 2017. Seventeen years. Seventeen years of becoming someone new – again and again. From the hills of Doon To the pink lanes of Jaipur, From the lanes… Read more

  • “पढ़ने से ज्ञान मिलता है, और ज्ञान से शान्ति, समृद्धि प्राप्त होती है।” हमेशा से यही सुनता आया हूँ।यही बताया गया, यही सिखाया गया, और पैदा होते ही झोंक दिया गया हमें भी बाक़ी सभी की तरह ज्ञान प्राप्त करने की अग्नि में। अंग्रेजी, हिंदी, गणित, भूगोल, इतिहास, विज्ञान समाजशास्त्र पढ़ते पढ़ाते कब हाईस्कूल, इंटरमीडिएट… Read more

  • तो भैया हुआ यूँ की आठ सालपहले सन 2017 में जब वर्ल्ड कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार कर भारतीय महिला क्रिकेट टीम सुबह तड़के 5:30 बजे एयरपोर्ट पहुँची तो शायद उन्हें भी अंदाज़ा नहीं रहा होगा कि महिला क्रिकेट टीम के फाइनल में हारकर देश वापस लौटने का किसी को इंतज़ार तो छोड़ो… Read more

  • मेरा ऑफिस गुड़गांव के पॉश इलाके – गोल्फ कोर्स रोड पर है और मैं वहीं पास में एक कमरा किराए पर लेकर रहता हूँ। चूँकि ऑफिस पास में ही है, तो पैदल ही आना जाना होता है। रास्ते में एक बहुत बड़ा रेजिडेंशियल अपार्टमेंट निर्माणाधीन है, तो सुबह और शाम, दोनों शिफ्ट पर पीले हेलमेट… Read more

  • Engineer’s Day – 15th September

    Think about it for a moment – Whether you’re working from your laptop in a high-rise tower, cruising down a smooth highway for your next business trip, or boarding a flight for that long-awaited family vacation – there’s one invisible force that makes all this possible: Civil Engineering! From highways that don’t just connect cities… Read more

  • हैशटैग हिंदी दिवस

    “अरे भाई आपकी टाइमिंग ग़लत है, अरे मौक़ा देख कर स्टेटस लगाइए!” पिछले तीन दिनों से माँ शक्ति की एक पेंटिंग पर काम कर रहा था, थोड़ी डिटेलिंग ज़्यादा थी तो समय लग गया और आख़िर आज उसे पूरा करके ह्वाट्सऐप पर स्टेटस लगाया (बस यूँ ही लगा देता हूँ, कोई विशेष प्रयोजन नहीं होता)… Read more

  • करीब साल भर पहले उदयपुर गया था। वहाँ कंपनी का लैपटॉप ऐसा था मानो माता-पिता का सख़्त पहरेदार – “बेटा, यूट्यूब नहीं देखना है, सिर्फ़ काम करना है!” अब दिल तो पढ़ाई करने को मचल रहा था, एक्सेल-पॉवर बीआई सीखने का। पर अक्ल ने कहा, “बेटा, लैपटॉप तो सरकारी स्कूल का प्रधानाचार्य है, एक टैबलेट… Read more

  • वैश्विक मानचित्र पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ट्वीट्स और उनके विश्व शांति के दूत सरीखे बयानों और हर किसी पर टैरिफ ठोकने की होड़ पर निराला जी की कालजयी रचना ‘रश्मिरथी’ से प्रेरित एक हास्य व्यंग्य के द्वारा आज के माहौल पर कटाक्ष करने का प्रयास: मैत्री की राह बताने को,सबको सुमार्ग पर लाने… Read more

  • The biggest myth in leadership? That it needs a title. That it needs a position. But every time Mohammed Siraj charges down the field, ball in hand or chasing it down the boundary, he shatters that myth – just like that tiny squirrel from the Ramayan, who gave her all while the mighty Vanar Sena… Read more

  • आख़िरी सफ़र

    नौकरी करते हुए बारह बरस से अधिक हो चुके हैं, और एक दशक से लंबे इस सफ़र में नौ से अधिक शहर बदल चुका हूँ। हर शहर की अपनी विशिष्टता, अपनी संस्कृति, और कुछ जगहों पर एक अलग तरह का ही अपनापन मिला। कहीं से निकलने पर सुकून मिला तो कुछ जगहों को छोड़ने पर… Read more

  • Avengers and the Art of Letting Go:

    A Story Beyond the Endgame When we first met them, they were everything we dreamed of becoming. Tony Stark raced through Manhattan in his Audi R8, Bruce Banner cracked quantum theories, Thor wielded lightning like a toy, and Steve Rogers was the living embodiment of duty, strength, and honor. They had it all—power, fame, glory,… Read more

  • नीम का पेड़

    आज विनायक के स्कूल में एक प्रोजेक्ट के लिए (जिसमे बच्चों को पेड़ों के बारे में कुछ क्रिएटिव बनाना या लिखना था) “नीम का पेड़” बनकर हाथों में कॉलोनी से ही नीम के पेड़ से तोड़ कर लायी गई पत्तियों को थामे अंग्रेजी और हिंदी में कविता रूपी पंक्तियों को कहते देख बुधई राम की… Read more

  • मानस जीवन दर्शन “मैंने उसके लिए क्या कुछ नहीं किया… पर बदले में उसने मुझे यही सिला दिया???” हम में से कई लोग कभी न कभी यह वाक्य ज़रूर कह चुके होंगे किसी बेहद खास के लिए, या किसी खास से सुन चुके होंगे। कभी किसी सहकर्मी के लिए, कभी किसी दोस्त, भाई, बॉस, पड़ोसी… Read more

  • आज शाम को कमरे से जब दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए निकला तो हमेशा की तरह अपना पिट्ठू बैग लादा, नीचे सीढ़ियाँ उतरते उतरते ही मोबाइल पर रैपिड मेट्रो स्टेशन के लिए बाइक टैक्सी बुक की और जब तक लॉज से बाहर निकलता हमारे सारथी महोदय अपनी दुपहिया पर सामने खड़े दिखाई दिए। ओटीपी बताया… Read more

  • गर्मी में तपती छतें, उबलती सड़कें, और प्यासी धरती को तर बतर करने हर साल की तरह आख़िरकार इस साल भी बरसात आ ही गई। पहली-पहली बारिश की वो बूँदें और भीगती मिट्टी की सौंधी खुशबू, जो अमूमन हर किसी को कहीं न कहीं ज़रूर ले जाती हैं।कोई नग़मों में भीगता है, कोई पकौड़ों की… Read more

  • भूल चूक माफ़ बॉलीवुड का दशकों पुराना ‘चोला’ अब आज के कलाकारों ने बख़ूबी ओढ़ लिया है। शेक्सपियर के मशहूर डायलॉग “नाम में क्या रखा है” को बॉलीवुड ने कुछ ज़्यादा ही गंभीरता से ले लिया है।अमूमन हर फ़िल्म में एक धूर्त, पाखंडी पंडित ज़रूर होता है – जिसकी नीयत हमेशा लालच और कपट से… Read more

  • “इतिहास वह नहीं जो तलवार की धार पर युद्ध के मैदान में बहे लाल खून पर घटा, अपितु वह है जो दवात की काली स्याही में डूबे कलम की नोक से लिखा गया।” आज अत्यंत ही भावुक और कृतज्ञता से यह लेख लिखते हुए जो भाव मेरे मन में है आप तक पहुँचानें का प्रयास… Read more

  • दो दिन पहले रविवार को फल काटते समय चाकू से उँगली ज़रा सी कट गई और कुछ बूँदें ख़ून की टपक गईं। और तबसे लैपटॉप पर टाइपिंग से लेकर गाड़ी चलाने में दिक्कत आ रही। लेकिन कल रात को तीन घंटे एक विशाल अंधेरी कोठरी में बिताने के बाद अब जब उँगली पर लगी इस… Read more

  • आज ऑफिस में प्रयागराज महाकुंभ के बारे में चर्चा होने लगी, और मेरे एक साथी ने बड़ा ही वाज़िब प्रश्न किया – “जब करोड़ों रुपए खर्च करके इतना सारा ताम झाम किया गया तो लगे हाथों बनारस या हरिद्वार की तरह ही पूरे संगम क्षेत्र में पक्के और व्यवस्थित घाट क्यों नहीं बनवा दिए जाते?… Read more

  • प्रयागराज की पावन धरा पर त्रिवेणी संगम स्थित भव्य और दिव्य महाकुंभ इस वक्त सारी दुनिया के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, और सिर्फ दस दिनों में ही करोड़ों श्रद्धालु प्रयाग की इस पावन धरा पर पहुँच चुके हैं और अगले एक महीने में करोड़ों और श्रद्धालु आने वाले हैं। एक ओर जहाँ तंबुओं… Read more

  • “इतिहास तलवार की धार पर रचे ज़रूर जाते हैं, लेकिन उन्हें अमरता कलम की स्याही देती है। और यह स्याही युद्ध में बहे खून से भी ज़्यादा घातक होती है।” पिछले वर्ष, अमीष जी की पुस्तक ‘लीजेंड ऑफ़ सुहेलदेव’ ने मुझे भारतीय इतिहास के उन अनकहे और विकृत अध्यायों को जानने की जिज्ञासा से भर… Read more