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कुछ नया जानें

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  • साल बदल रहा, बस चंद घंटों में ही आपकी दीवार पर टंगा हुआ कैलेंडर रद्दीवाले को दिए जाने वाले अखबारों के ढेर में जा चुका होगा।और अगर आप झेपटो, झोमाटो, बिलिंकित का प्रयोग करते हैं और एक सशक्त एवं जानकार वित्त विशेषज्ञ हैं तो निश्चित ही आपने अपने किसी रिश्तेदार से एलआईसी की पॉलिसी भी… Read more

  • आज 19 दिसंबर को हमारा देश काकोरी बलिदान दिवस के रूप में मनाता है। यद्यपि मुझे पूरा विश्वास है की रील और मीम की दुनिया में खोयी आज की युवा पीढ़ी को कदापि यह ज्ञात भी न हो की लटके झटके दिखा कर लाखों व्यूज और लाइक्स की यह अंधी दौड़ हमारे समाज के विकृत… Read more

  • कौमोदकी गदा

    आज शाम हनुमान मंदिर में बैठकर सुंदरकांड का पाठ करते समय सामने संकटमोचन श्री हनुमान की मूर्ति को निहारते हुए मन में कौतूहल वश जिज्ञासा हुई की जो स्वयं परमशक्तिशाली हैं, बुद्धि, विवेक व ज्ञान के अधिष्ठाता हैं और जो प्रभु श्री राम के सबसे प्रिय हैं उन्हें गदा की क्या आवश्यकता? तो घर वापस… Read more

  • मनु जैसा मन

    आज ही के दिन १९ नवंबर १८२८ को वाराणसी के मणिकर्णिका के पास मोरोपंत और भागीरथी तांबे के घर भागीरथी के तट पर बालिका का जन्म हुआ नाम, रखा गया मणिकर्णिका। कानपुर के पास स्थित बिठूर में पेशवा बाजीराव के यहाँ पली बढ़ी मनु को बचपन से ही धर्म शास्त्र, शस्त्र विद्या व घुड़सवारी सीखने… Read more

  • कार्तिक माह के तेरहवें दिन को धनत्रयोदशी या धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन से जुड़ी कई मान्यताएं हैं।ऐसा माना जाता है की क्षीरसागर (हिन्द महासागर) का मंथन देवताओं और दैत्यों ने मिलकर किया था। जिसमे मंदराचल पर्वत को वासुकि नाग से लपेट कर समुद्रमंथन हुआ था। पर्वत का भार उठाने को… Read more

  • कलाम की कलम

    आज यानी 15 अक्तूबर को भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम का जन्म सन् 1931 में तमिल नाडु के रामेश्वरम् जिले में हुआ था। अत्यंत ही गरीबी में गुज़रे बचपन ने कलाम साहब को कच्ची उम्र में ही पक्के इरादे रखने वाला इंसान बना दिया था। उनका सपना था की वे… Read more

  • दशहरा की झाँकी

    आज विजयदशमी यानी दशहरा पर सुबह से ही सोच रहा था की कुछ लिखा जाए। दोपहर तक दो तीन ड्राफ्ट अलग अलग तरह से लिखने के बाद भी वो मज़ा नहीं आ रहा था जो मैं पूरा कर सकूँ। अभी तक तो हमेशा बड़े ही आसानी से मन के भाव स्याही के माध्यम से काग़ज़… Read more

  • ‘नन्हे’ को नमन

    एक सौ बीस बरस पहले 2 अक्तूबर 1904 को बनारस के पास मुगलसराय के एक छोटे से क़स्बे में ‘नन्हे’ का जन्म हुआ था।नन्हे बचपन से ही पढ़ने का बहुत शौक़ीन था तो बनारस अपने चाचा के पास आ गया। ग़रीबी का आलम यह था की पैरों में चप्पल तक नसीब नहीं थी।लेकिन भीषण गर्मी… Read more

  • नमक का किस्सा

    ऑफिस का काम पूरा कर रूम पर जाने की बजाए अक्सर हम मेस की ओर निकल आते हैं, और रात्रि भोजन करके ही सीधे रूम पर पहुचते हैं। इससे हमारा रूम पर जाकर वापस ऑफिस आने का चक्कर बच जाता है ।वैसे रूम भी हमने ऑफिस से कुछ एक किलोमीटर पर ही ले रखा है।… Read more

  • जुनून किस बात का

    हम हमेशा से पढ़ते देखते और सुनते आए हैं की दुनिया ऐसे अनेक किससे कहानियों से भरी है जब किसी एक इंसान, किसी एक समूह, किसी एक समाज या किसी एक देश ने जुनून के दम पर वो कर दिया जो लोग आम तौर पर सोच भी नहीं सकते। फिर चाहे वह जंग हो, किसी… Read more

  • शहर में रहने लगे हो तुम, क्या जानो गांव की गलियों को तुम। एसी की ठंडी हवा में पसीना नहीं आता, पर चूल्हे के सामने फुँकनी से धुंए के बीच आंच सिर्फ पसीना नहीं बल्कि आँखें भी जलाती है। आँखें तो तुम्हारी भी जलती होंगी जब दिन भर की सडकों पर धुआं उड़ाती गाड़ियां शहर… Read more

  • बचपन की झांकी

    वैसे तो अमूमन लोगों का प्रिय त्यौहार होली या दिवाली ही होता है, लेकिन मेरा प्रिय त्योहार हमेशा से श्री कृष्णा जन्माष्टमी हुआ करता था। बचपन में शायद यह पहला त्यौहार था जिसमे हम बच्चों को भी घर के बड़ों के साथ व्रत रखने का मौका मिलता था। जिसमे दिन भर तो फलाहार करने का… Read more

  • बड़ा कौन ?

    मध्यम वर्गीय होना लोग अभिशाप समझते हैं। यहाँ तक की आज के दौर में शायद गरीब से ज्यादा तिरस्कृत एक मध्यम वर्गीय व्यक्ति महसूस करता है। समाज के खोखले ताने बाने में उलझा हुआ, सोशल मीडिया और अपार्टमेंट कल्चर में खुद को फिट बैठाने के चक्कर में बेचारा ज़रूरत और शौक में फर्क ही नहीं… Read more

  • दो पुलों के बीच

    कॉलेज से निकले हुए लगभग दो वर्ष हो चुके थे, उस वक्त शायद मैं नोएडा में कार्यरत था और ईद की छुट्टी शनिवार के साथ आयी थी तो मौक़ा पाकर इलाहाबाद (अब प्रयागराज) भाग आया था। उसी दौरान पंडित भी गाँव आया हुआ था, बात हुई और बन गया प्लान मिलने का। टेढ़ई को उसके… Read more

  • शौक़ कैसे लगा ?

    अभी दो दिन पहले अपनी यात्रा के दौरान एक सहयात्री के साथ बड़ी अच्छी परिचर्चा चल निकली। ट्रेन उस दिन आगरा से ही चालू होनी थी और लगभग पूरी ही बोगी ख़ाली ही थी तो मैं लोअर बर्थ पर ही बैठ गया जबकि मेरी सीट अपर बर्थ की थी, और आदतन किताब खोल कर रेणु… Read more

  • एंटी सोशल मीडिया

    “ज्यादा देर टीवी के सामने बैठोगे तो आँखें ख़राब हो जाएँगी”“केबल टीवी लगवाने की क्या ज़रूरत है, दूरदर्शन और डी डी मेट्रो पर इतना सब आता तो है, पढाई कब करोगे?”“अच्छा हुआ बिजली कट गयी कम से कम इस टीवी को तो आराम मिलेगा थोड़ी देर”“अरे अब वापस घर आने का इरादा है या रात… Read more

  • यह वाक़या बड़ा ही मज़ेदार रहा।कल सपनों की नगरी मुंबई से झीलों की नगरी उदयपुर की यात्रा बहुत ही मज़ेदार व् रोमांचक रही।मेरे साथ में फ्लाइट में रहे सहयात्री शायद यह वाक्य सुनकर त्योरियाँ चढ़ा लेंगे। और कई ने तो कल ही रात को अपने अपने सोशल मीडिया अकाउंट और रिश्तेदारों को इस यात्रा का… Read more

  • रश्मिरथी

    दिनकर जी की यह कालजयी कृति अद्भुत है। महाभारत पर आधारित यह काव्य रंग भूमि में पांडव व कौरव के बीच प्रतिस्पर्धा के दौरान कर्ण के पदार्पण से शुरू होता प्रथम सर्ग ही आज के दौर में भी एक एक शब्द की सार्थकता लिए हुए है। फिर चाहे वह आरक्षण हो, ऊंच नीच हो, या… Read more