Bharatvarsh.online

कुछ नया जानें

S.I.R. – It’s done Bro!

प्रयागराज से लखनऊ तक मतदाता सूची में नाम स्थानांतरित कराने का हमारा अनुभव—कुछ कागज, पाँच BLO और लोकतंत्र पर मचे बेमतलब के शोर पर एक व्यंग्यात्मक नजर।

एसआईआर की कहानी: हमारे नाम कटे, कॉकरोचों की राजनीति चमकी!

एसआईआर के नाम पर इतना हो-हल्ला मचा है कि लगता है चुनाव आयोग मतदाता सूची नहीं, लोकतंत्र का डेथ सर्टिफिकेट जारी कर रहा हो!

चलिए, इसी बीच अपनी कहानी भी सुन लीजिए।

पिछले साल जुलाई में पिताजी की सेवानिवृत्ति के बाद हमने प्रयागराज का सरकारी आवास खाली किया और स्थायी रूप से लखनऊ आ गए। आधार कार्ड और बाकी दस्तावेजों पर पता बदल गया, लेकिन हमारे वोटर कार्ड प्रयागराज में ही विराजमान रहे।

एसआईआर के दौरान मेरे, मेरी पत्नी और माता-पिता के नाम पुराने पते की मतदाता सूची से कट गए।

जी हाँ, हमारे भी नाम कटे थे!



अब हम चाहते तो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते थे, धरना दे सकते थे, लोकतंत्र खतरे में है के पोस्टर छपवा सकते थे और अपने मोहल्ले के कॉकरोचों को बुलाकर क्रांति का बिगुल बजवा सकते थे!

लेकिन हमने एक छोटा-सा काम किया—अपने BLO से संपर्क किया।

प्रयागराज, लखनऊ और रायबरेली के तीन जिलों में पाँच BLO से संपर्क हुआ। कहीं नाम की स्पेलिंग गलत थी, कहीं आधार से लिंकिंग की समस्या, तो कहीं मोबाइल नंबर अपडेट कराना था।

BLO ने रास्ता बताया। गाँव से पुरानी मतदाता सूची का रिकॉर्ड जुटाया। आवश्यक दस्तावेज लगाए, फॉर्म-6 और फॉर्म-8 की प्रक्रिया पूरी की। और फरवरी तक परिवार के सभी पात्र सदस्यों के मतदाता रिकॉर्ड सही पते पर अपडेट हो गए।

नाम पुराने पते से कटे, नए पते पर जुड़ गए। न कोई क्रांति हुई, न लोकतंत्र बेहोश हुआ!

पाँचों BLO ने सहयोग किया। किसी ने यह नहीं कहा कि पहले टीवी पर डिबेट कराइए, फिर आपका वोट बनेगा!

अब आते हैं हमारे प्रिय कॉकरोचों पर!

कुछ लोगों की राजनीति का गणित बड़ा अनोखा है। नाम कटे तो षड्यंत्र, नाम जुड़ें तो सवाल; प्रक्रिया हो तो परेशानी, प्रक्रिया न हो तो लोकतंत्र खतरे में!

इनके लिए समस्या का समाधान जरूरी नहीं, समस्या का राजनीतिक पोस्टर बनना जरूरी है। आखिर मुद्दा खत्म हो गया, तो कैमरे के सामने करेंगे क्या?

सवाल पूछना लोकतंत्र है, लेकिन हर प्रशासनिक प्रक्रिया को बिना तथ्य जाँचे षड्यंत्र बताना भी कोई लोकतांत्रिक सेवा नहीं!

हाँ, किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं कटना चाहिए। प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और हर शिकायत का समाधान होना चाहिए। हर व्यक्ति का अनुभव हमारे जैसा हो, यह जरूरी नहीं।

लेकिन हमारे मामले में BLO से संपर्क किया, प्रक्रिया समझी, दस्तावेज जुटाए और काम हो गया।

एसआईआर की मेरी कहानी का सार यही है—राजनीति अपनी जगह, मतदाता सूची अपनी जगह और समाधान के लिए BLO अपनी जगह!

चलिए भैया, दिवाली आने वाली है!

घर की साफ-सफाई में जुट जाइए। और हाँ, सफाई अच्छे से होनी चाहिए!

दिल्ली वाले कॉकरोचों का तो पता नहीं कि वे कब, कहाँ और किस मुद्दे पर प्रदर्शन करने निकल पड़ें, लेकिन घर में अगर एक भी कॉकरोच रह गया, तो दिवाली पर भाभीजी जरूर लाठीचार्ज करवा सकती हैं!

शुभ दीपावली! घर भी चमके, मतदाता सूची भी दुरुस्त रहे और कॉकरोचों से लोकतंत्र ही नहीं, रसोई भी सुरक्षित रहे!

⚠️ डिस्क्लेमर (थोड़ा व्यंग्य, थोड़ी सफाई!) 😂
यह लेख मेरे और मेरे परिवार के निजी अनुभव पर आधारित है। व्यंग्य का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या संगठन का प्रचार करना, विरोध करना या किसी की भावनाएँ आहत करना नहीं, बल्कि एसआईआर के इर्द-गिर्द मचे शोर पर मुस्कुराते हुए अपनी बात रखना है।


किसी को इसमें लोकतंत्र दिखे, किसी को राजनीति और किसी को कॉकरोच—यह अपनी-अपनी दृष्टि का विषय है! 😜


हाँ, तथ्यों की पुष्टि के लिए चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देख लें।

क्योंकि व्यंग्य में हँसी की छूट है, लेकिन मतदाता सूची में सही नाम होना जरूरी है! 🇮🇳

One response to “S.I.R. – It’s done Bro!”

एक उत्तर दें